राजस्थान में मंत्रालयिक कर्मचारियों का आंदोलन तेज, जयपुर कूच के बाद मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी
- By Gaurav --
- Monday, 22 Jun, 2026
Rajasthan Ministerial Staff Intensify
राजस्थान में भजनलाल सरकार के सामने ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का आंदोलन बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ के तहत पिछले करीब 20 दिनों से जारी पेन-डाउन हड़ताल अब और तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने जयपुर कूच और बड़े स्तर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी वजह से आंदोलन को व्यापक रूप देने का फैसला किया गया है। हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाण पत्र जारी करने, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि ग्रामीण सेवा शिविर-2026 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का बहिष्कार जारी है। कर्मचारी कार्यालयों में उपस्थित तो हो रहे हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की फाइल संबंधी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और विभागीय बैठकों का भी बहिष्कार किया जा रहा है।
संगठन ने 23 से 25 जून तक चरणबद्ध तरीके से जयपुर कूच का कार्यक्रम घोषित किया है। इस दौरान विभिन्न जिलों और ब्लॉकों से कर्मचारी राजधानी पहुंचकर राज्य सरकार को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर कैडर पुनर्गठन, अंतर-जिला स्थानांतरण नीति लागू करना, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने के लिए नए पदों का सृजन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त भत्ते प्रदान करना शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने कनिष्ठ लिपिक पद के पुनर्गठन और उसे ‘पदेन सचिव’ अथवा ‘कार्यक्रम अधिकारी’ के रूप में उन्नत करने की मांग भी उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तों में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं किया गया।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। इसके तहत 6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव और 7 जुलाई को जयपुर के जल महल के सामने ‘जल समाधि’ जैसे प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चलता है तो ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था, विकास कार्यों और सरकारी सेवाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।